Taj Mahal Controversy: क्या ताजमहल पहले शिव मंदिर था? हाईकोर्ट में 7 जुलाई को होगी अहम सुनवाई
Taj Mahal Controversy को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में 7 जुलाई को अहम सुनवाई हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने ताजमहल परिसर के ASI सर्वे की मांग की है। जानिए क्या है पूरा मामला।
Taj Mahal Controversy: 7 जुलाई की सुनवाई पर टिकी सबकी नजर
Taj Mahal Controversy एक बार फिर चर्चा में है। आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध Taj Mahal को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर याचिका पर 7 जुलाई को महत्वपूर्ण सुनवाई होने की संभावना है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ताजमहल का मूल स्वरूप भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर का 'तेजो महालय' मंदिर था। इसी दावे की जांच के लिए अदालत से वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब तक इस दावे की सत्यता पर कोई टिप्पणी या फैसला नहीं दिया है। फिलहाल अदालत केवल सर्वे कराने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करेगी।
क्या है याचिकाकर्ताओं की मांग?
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि पूरे Taj Mahal परिसर का सर्वे कराने के लिए Advocate Commissioner नियुक्त किया जाए। उनका कहना है कि वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से जांच होने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस स्थान पर पहले मंदिर था या नहीं।
यह याचिका आगरा की सिविल कोर्ट और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश द्वारा सर्वे की मांग खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई है।
2015 से चल रहा है मामला
याचिका के अनुसार, वर्ष 2015 से इस विषय पर सिविल कोर्ट में मुकदमा लंबित है। इसमें ताजमहल को भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर का तेजो महालय घोषित करने की मांग की गई है।
यह याचिका भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर की ओर से उनके 'नेक्स्ट फ्रेंड' हरीशंकर जैन और अन्य पांच याचिकाकर्ताओं ने संयुक्त रूप से दायर की है। मामले में भारत सरकार, Archaeological Survey of India (ASI) और अन्य पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है।
आगे क्या हो सकता है?
यदि इलाहाबाद हाईकोर्ट सर्वे के लिए Advocate Commissioner नियुक्त करने की अनुमति देता है, तो मामले की कानूनी प्रक्रिया नए चरण में प्रवेश कर सकती है। वहीं, यदि याचिका खारिज होती है तो वर्तमान स्थिति बरकरार रहेगी।
फिलहाल अदालत के समक्ष केवल सर्वे कराने की मांग पर सुनवाई प्रस्तावित है। ताजमहल के इतिहास या याचिकाकर्ताओं के दावों की सत्यता पर अभी तक कोई न्यायिक निर्णय नहीं आया है।
क्या है पूरा विवाद?
ताजमहल को लेकर वर्षों से यह विवाद समय-समय पर सामने आता रहा है। कुछ लोग इसे मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा बनवाया गया मकबरा मानते हैं, जबकि कुछ याचिकाकर्ता इसे प्राचीन तेजो महालय मंदिर बताते हैं। इसी दावे की जांच के लिए अदालत में सर्वे कराने की मांग की गई है।